चेन्नई: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना चल रहा है। इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) की चुप्पी राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। चुनाव के दौरान छात्रों के हितों और नीट के विरोध को प्रमुख मुद्दा बनाने वाले मुख्यमंत्री विजय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आने पर सवाल उठ रहे हैं।
फिल्म के प्रचार के बीच आंदोलन पर नहीं दी प्रतिक्रिया
एक रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री विजय की आलोचना तब तेज हो गई, जब उन्होंने सोमवार को अपनी आगामी फिल्म ‘जन नायगन’ का प्रचार वीडियो साझा किया, लेकिन दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन और नीट विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की। इसके बाद विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने उनकी चुप्पी पर सवाल खड़े किए।
रैपर अरिवु की हिरासत के बाद बढ़ी चर्चा
मंगलवार को चेन्नई में तमिलनाडु सचिवालय के पास नीट परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे तमिल रैपर अरिवु को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पूछताछ के लिए ले जाए जाने के दौरान अरिवु ने सवाल उठाया कि जब देशभर में नीट को लेकर विरोध हो रहा है तो मुख्यमंत्री विजय इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। बाद में उन्हें मुख्यमंत्री विजय और तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) के मंत्री आधव अर्जुन से मुलाकात के लिए ले जाया गया। हालांकि सरकार की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
उदयनिधि स्टालिन ने जताया विरोध
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने अरिवु को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नीट के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह तमिलनाडु के उन युवाओं के लिए चिंताजनक संदेश है, जो दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में आवाज उठाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नीट केवल विसंगतियों से भरी परीक्षा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा घोटाला बन चुकी है।
तमिलनाडु में वर्षों से जारी है नीट का विरोध
तमिलनाडु लंबे समय से नीट परीक्षा का विरोध करता रहा है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2024 के बीच नीट से जुड़े कम से कम 26 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। राज्य सरकार का तर्क है कि यह केंद्रीकृत परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और तमिल माध्यम के छात्रों के लिए नुकसानदायक साबित होती है। नीट लागू होने से पहले मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर होता था, जिसे सामाजिक न्याय के लिहाज से अधिक उपयुक्त माना जाता था।
अनिता की आत्महत्या के बाद तेज हुआ था आंदोलन
वर्ष 2017 में 17 वर्षीय दलित छात्रा एस. अनिता की आत्महत्या के बाद तमिलनाडु में नीट विरोध आंदोलन ने व्यापक रूप लिया था। अनिता ने 12वीं में 1200 में से 1176 अंक हासिल किए थे, लेकिन नीट परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सकीं। इसके बाद 1 सितंबर 2017 को उन्होंने आत्महत्या कर ली। उनकी मौत के बाद वह राज्य में नीट विरोध आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गईं।
राजनीतिक रणनीति मानी जा रही है विजय की चुप्पी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री विजय की चुप्पी केंद्र सरकार के साथ सीधे टकराव से बचने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। उनका मानना है कि सरकार फिलहाल किसानों के पैकेज और अन्य स्थानीय मुद्दों पर अधिक ध्यान दे रही है। चुनाव से पहले टीवीके ने भारतीय जनता पार्टी को अपना वैचारिक विरोधी बताया था, लेकिन मुख्यमंत्री विजय ने अब तक प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार की खुलकर आलोचना नहीं की है। ऐसे में उनकी वर्तमान रणनीति को ‘वेट एंड वॉच’ के तौर पर देखा जा रहा है।
